शुक्रवार, 4 मार्च 2011

सरकार बेटियों को आगे बढाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी, अन्त्योदय मेलों के माध्यम से सरकार गरीबों के दरवाजे जायेगी //-

मुख्य मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि सदन में बहस अर्थ मूलक और रचनात्मक होनी चाहिए बहस के लिए बहस और आरोप के लोए आरोप नहीं लगाना चाहिए विधान सभा में गुरूवार को राज्यपाल के  अभि भाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का उत्तर देते हुए मुख्य मंत्री ने कहा कि महापुरुषों से प्रेरणा लेने के लिए हम राजा भोज राज्यारोहन सह्श्त्रब्दी जैसे समारोह मनाते रहेंगे इसमें आपत्ति नहीं होना चाहिए केन्द्र का पैसा लेना राज्य का अधिकार है जिसे हम मांगेगे ,मांग और काम के आधार पर ही हम पैसा मांगते हें ,इस बार 46 जिलों में पाला पड़ा है और पाला पीड़ितों को 1000 करोड़  का मुआवजा मिलेगा,हमारी दिशा और दृष्टी तय है संकल्पों का क्रियान्वयन हम कर रहे हें यही हमारा रोड मेप है,खेलों को प्रोत्साहन देने, उन्हें बढाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमें भारत सरकार ने उत्कृष्टता अवार्ड से सम्मानित किया है हमारी अनेकों योजनाये कर्नाटक और अन्य राज्य सरकारें लागू कर रही है ,हमने मध्यप्रदेश की प्रमुख सड़कों को राष्ट्रीय राज मार्ग से जोड़ा है इसके लिए अब तक हमें 2009 /10 में 194 करोड़  रुपया मिला है हम गंभीरता से काम कर रहे हें ,प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत हम अवल्ल हें ,मांग और पूर्ति का अंतर कम हो इसके लिए हम प्रयास रत हें म.प्र के सभी गावों में 3 साल बाद 24 घंटे पानी देने का उनका वादा है इस हेतु  बनाए गए 5 साल के रोड मेप के आधार पर 25 हजार करोड़  सिंचाई के मामलों में व्यवस्था करके छोटी सिंचाई की योजनाओं को पूरा करने की बात भी उन्होंने कही ,
एक महत्वपूर्ण योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उधोग-धंधों की नई संवर्धन निति में उधोगों में लगे 80 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार मिले ऐसी व्यवस्था की गई है ,अब तक ऐसी 72 योजनाओं पर काम शुरू हो चूका है,और इससे 3 लाख लोगों को रोजगार मिल चुका है साथ ही जिसमें दोहरी कर प्रणाली के अंतर्गत टेक्स में छूट भी मिलेगी उन्होंने सख्ती से सपष्ट किया कि लीज पर जमीन लेकर काम ना करने पर उसे निरस्त करने का सपष्ट रूप से प्रावधान किया गया है और इसी संदर्भ में हम 40 करोड़ कि योजनायें शुरू करने जा रहें हें ,अपने जवाब में उन्होंने आगे कहा कि सरकार बेटियों को आगे बढाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी,हमने बेटी के जन्म से लेकर आखरी साँस तक अनेको योजनायें चालू की हेंऔर अब तक 753 करोड़ रुपया उन्हें दिया जा चुका है सरकार की कन्या दान सहित अनेको योजनाओं का लाभ अल्पसंख्यक वर्ग को भी मिल रहा है 40 हजार स्कुल भवनों का निर्माण हुआ है ,उन्होंने ये भी स्वीकारा कि ३२ बच्चें इस वर्ष स्कुल नहीं जा सके यह स्थिति ठीक नहीं अल्पज्ञान या पढाई कर लेने मात्र से कुछ नहीं होगा हमें शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाना होगा ,कांग्रेस के ब्रजराज सिंह चौहान के सच्चर रिपोर्ट लागु नहीं किये  जाने के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी कोई रिपोर्ट लागु नहीं करेगी जिससे कि साम्प्रदायिकता बढे उन्होंने शिशु  और मात्र  म्रत्यु दर पर पर आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि जन संख्या वृद्धी की दर को  रोके बिना हम प्रगति नहीं कर सकते ..परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रम को गंभीरता से चलाये जाने पर बल देते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण [टू द पाइंट ]घोषणाये भी कि......
[1]जैसे आय से अधिक सम्पत्ति राजसात की जा सकेगी साथ ही विशेष न्यायलय के गठन की व्यवस्था पर  इसी सत्र में विधेयक पेश किया जाएगा 
[2]समर्थन मूल्य  पर किसानो की बोनस राशि उनके खाते में डाली जायेगी  
[3]अन्त्योदय मेलों के माध्यम से सरकार गरीबों के दरवाजे जायेगी [इस हेतु 15 करोड़ निर्धारित]
[4]बढती हुई जनसंख्या के अनुरूप पुलिस बल बढाने पर जोर,
[5]अनुसूचित जाती-जनजाति के छात्रों की छात्रवृति महंगाई दर के हिसाब  से बढती जायेगी,
[6]नक्सलवाद को हटाने के विशेष प्रयत्न  किये जायेंगे 
[7]इस बार बेटों को भी सायकिल दी जायेगी और गणवेश के साथ सायकिल राशि नकद अभि भावकों को दे दी जायेगी 
                          प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर उन्होंने संतुष्टि जाहिर की साथ ही कर्ज ली गई राशि को विकास के कार्यों पर खर्च की बात कही केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश की प्रशंसा करने की बात कहते हुए उन्होंने कहा की बावजूद कभी- कभी हमें अपना अधिकार नहीं मिलता, आंकड़े सदन में प्रस्तुत करते हुए मुख्य मंत्री ने प्रदेश के लगातार उन्नति की ओर अग्रसर होने की  बात दोहराते हुए कहा की आज हम विकसित राजों की श्रेणी में आ खड़े हुए हें ...हमारे पारित संकल्प ही हमारा रोड मेप है.  

 

शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

म.प्र. के २०११-२०१२ के पेश बजट में महिला एवं बल विकास हेतु विशेष बजट प्रावधान प्रस्तावित//-

मध्यप्रदेश का  इस वर्ष का कुल व्यय रूपये ६५,८४५ करोड़  अनुमानित है जो वर्ष २०१०-११ के मुकाबले में रूपये ५१,५०७ करोर्ड के बजट के अनुमान से २८प्रतिशत अधिक है ये एक कीर्तिमान ही कहा जाएगा ये सच है किवर्ष २००८-९और २००९-१० में विकास कि दर राष्ट्रिय औसत  दर सेभी अधिक रही ..मध्यप्रदेश सरकार ने इस वर्ष को संतुलित करने का प्रयास किया है और इस कयास को विफल करने का प्रयास किया है कि [कहीं सूखा पडेगा और कहीं आएगी बाढ़] वित्त मंत्री राघव जी ने  पेशतर अपने आठवें बजट को  यथा संभव हर क्षेत्र में संतुलित और न्योयोचित किया है ...उर्जा, सडक ,सिंचाई .पेय जल कृषि ,आवास और पर्यावरण शिक्षा पर्यटन संस्कृति खेलकूद पंचायत एवं ग्रामीण विकास स्वास्थ्य ,अनुसूचित जनजाति कल्याण ,नगरीय निकाय ,सामाजिक न्याय उधोग एवं खनिज क़ानून व्यवस्था ,जन भागी दारी प्रशासनिक सुधार  ''कर्मचारी कल्याण ''आदि पर सर्वाधिक १४००० करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार अनुमानित है लेकिन इस वृद्धी से राज्य सरकार और केंद्र सरकार के द्वारा दिए जा रहे महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत का अंतर समाप्त हो जाएगा ..बावजूद इस बजट को महिला एवं बाल विकास कि द्रुष्टि से ज्यादा समझदारी के साथ पेश किया गया है ...महिला एवं बाल विकास हेतु लाडली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत वर्ष २०११-१२ हेतु ४३९ करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है जो कि पिछले वर्ष के मुकाबले ३०२ करोड़ से ४५ प्रतिशत अधिक है साथ प्रदेश को कुपोषण से मुक्त करने के उधेश्य से जो ''अटल बाल आरोग्य मिशन  कि स्थापना क़ी गई है ...इसमें मिशन क़ी गतिविधियों के लिए ०११ २० ११ -१२ में ८८ करोड़ रुपयों का प्रावधान है .साथ ही प्रदेश में ११ से १८ वर्षीय किशोरी बालिकाओं के पालन-पोषण एवं स्वास्थ्य में सुधार ,घरेलू कार्यों में दक्षता तथा जीवन उपयोगी आवश्यक प्रशिश्क्षण देने हेतु राजिव गांधी किशोरी बालिका सशक्तिकरण योजना ''सबला''' के अंतर्गत १५ जिलों में ४० करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है , एवं आँगन वाड़ी भवनों के निर्माण हेतु १०० करोड़ का प्रावधान रखा गया है ,और उनके रख-रखाव हेतु ८ करोड़ प्रस्तावित है इस तरह कहा जा सकता है क़ी वित्त मंत्री जी ने सूझ-बुझ से महिलाओं क़ी तरक्की और उनके सफल-सुखद और स्वस्थ  भविष्य के लिए कुल बजट राशि में से ६,६७ [छेह हजार सडसठ  करोड़]  रुपयों राशि  का प्रावधानप्रस्तावित किया है.

गुरुवार, 5 अगस्त 2010

कैसे मिले शोषित महिलाओं को त्वरित न्याय ?

सन २००१ में एक महिला शक्ति सम्पन्नता नीति बनाई गई थी, जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार ने महिलाओं को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक तौर पर सबल बनाने पर जोर दिया था.. बाद में सरकार बदली और नई परिस्थितियों में भी महिलाओं की बेहतरी के लिए छोटी -बड़ी घोषणाएं हुई, उनके हित में थोड़ा बहुत काम भी हुआ...इन सबके बावजूद जब हम सचाई से रूबरू होते है तो देखते हैं कि आज भी गरीब और निम्न वर्ग की महिलायें मूल धारा से कटी ,उत्पीडन के साथ अस्तित्व विहीन जीवन जी रही हैं.. इन औरतों को जितना सहयोग मिलना चाहिए नहीं मिलता. हमारे संविधान के अनुच्छेद 39 [क] में राज्यों को यह दायित्व दिया गया है कि वह सुनिक्षित करे कि कोई भी नागरिक न्याय पाने से वंचित ना रह जाये और इस दायित्व को निभाने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम-1987 लागू किया गया, इस अधिनियम की धारा 19 में लोक अदालतों की व्यवस्था है जिसमे प्रत्येक राज्य, नियमित अंतराल पर जिला अथवा तहसील में लोक अदालतों का आयोजन करने के लिए बाध्य है... इसमें पारिवारिक विवादों और अन्य मामलों को समझौतों के आधार पर त्वरित निराकरण किया जाता है लेकिन बहुत से मामले ऐसे भी होते है जो अदालती पेचदगियों में फँस कर रह जाते हैं, और कभी-कभार विशेष महिला लोक अदालतें भी आयोजित की जाती हैं... ऐसी ही एक महिला लोक अदालत का आयोजन दो-तीन वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में लगाई गई थी, तब मैं वहां मौजूद थी जहाँ मुझे पीड़ित महिलाओं और अदालत के बीच मध्यस्ता करनी थी, जहाँ तीन भिन्न आयु वर्ग की महिलायें अदालत में उपस्थित थी जिन्हें भिन्न कारणों से उनके पतियों ने छोड़ दिया था.. क्षेत्रीय अदालतों ने उनके भरण-पोषण हेतु जो मुआवजा तय किया था वह उन्हें कई दिनों से नहीं मिला था. इनमे से एक थी ४७ वर्षीय मथ्थो बाई जिसका पति "एम.पी. ई. बी." में लाइनमेन था ,वो बीस हजार रूपये देकर पत्नी से पीछा छुड़ाना चाहता था उसने १५ वर्ष पहले ही किसी दूसरी औरत से विवाह कर लिया था, अदालत को जब ये बताया गया कि वो सरकारी नौकरी में है और रिटायरमेंट के बाद उसे मोटी रकम मिलेगी तो क्यों ना वह अपनी पहली पत्नी को एक लाख बीस हजार रूपये दे..? ताकि वो अपना गुजारा थोड़ा बहुत ठीक से चला सके.. अदालत ने उसी शाम मथ्थो बाई के पति को उक्त रकम देने का आदेश दिया, ये बात अलग थी कि सरकारी नौकरी में रहते हुए दूसरी शादी करने के आरोप में अदालत उसे सजा देती..
दूसरी महिला २३ वर्षीय गीता बाई थी वो अपने पति के साथ रहना चाहती थी लेकिन पति उसे साथ नहीं रख रहा था, उसका आरोप था कि गीता जिस बच्चे की माँ है वह उसका नहीं है, गीता शाम तक रोती रही लेकिन उस दिन उसका फैसला ना हो सका.. तीसरी औरत १८ वर्षीय यास्मीन थी, जो अपने बेहद गरीब पिता के साथ वहां मौजूद थी, जो किसी से बीस रूपए उधर लेकर अदालत तक पहुंची थी, लड़की का पिता बेटी को सुसराल नहीं भेजना चाहता था उसका आरोप था कि उसकी बेटी, पति और ससुर द्वारा दहेज के लिए प्रताड़ित होती है.. हालांकि लंच ब्रेक में उसने बताया की वो अदालत के सामने ये कभी नहीं बता पाएगी की उसका ससुर उसे किस किस तरह से यौन प्रताड़ना देता है.. अदालत में शाम तक सवाल जवाब का सिलसिला चलता रहा लेकिन यास्मीन के हक में कोई फैसला ना हो सका और अदालत अगले माह तक के लिए स्थगित हो गई..
तीन औरतों कि इस साधारण कहानी में शोषित औरतों के एक ऐसे तबके की ऐसी तस्वीर है जो जीवन आसानी से नहीं जी पा रही है, लोक अदालते/महिला लोक अदालतों का उद्देश्य भले ही आपसी द्वेष मिटाकर विवादों का निराकरण करना हो पर ऐसा शत-प्रतिशत कहाँ हो पाता है? महिलाओं को त्वरित न्याय मिले इसके लिए सरकार, न्यायपालिका, समाज और मीडिया को प्रभावी और महती भूमिका निभाने की जरूरत है..
हालांकि पिछले दिनों अप्रैल में नवलगढ़ [राजस्थान]में फास्ट ट्रेक अदालत ने 26 दिनों में ही एक नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार के प्रयास के अभियुक्तों को 5 वर्ष की कठोर सश्रम सजा का फैसला सुना कर अनूठी मिसाल पेश की है, देश की न्यायपालिका यदि मुकदमों पर त्वरित फैसले सुनाती है, तो मुकदमो के लगे ढेर को कम किया जा सकता है... न्याय पालिका को इसके लिए गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि हम सभी जानते हेँ समय पर ना मिलने वाला न्याय न्याय की श्रेणी में नहीं आता
[अगली कड़ी में अदालतों के अंतर्गत पेंडिंग मामले, "सी.आर.पी.सी." में नए संशोधन फास्टट्रेक अदालतों की गतिविधियां आदि..]